मुल्लाह
नसरुद्दीन नमाज़े फ़जिर से फ़ारिग होकर जब अपने घर वापस लौटा तो रोज़मर्राह की तरह
उसकी जवान बेटी दुबारी में बैठी कुरआन पढ़ती मिलती, अब्बा के आने की आहट पर वह
हड़बड़ी में अपने कमरे की तरफ़ फुर्ती से लपकी ही थी कि अब्बा ने पानी के एक गिलास की
फरमाइश कर दी. रहल पर खुले कुरआन को देख मुल्लाह से रहा न गया, उसी सफे से उसने
कुरआन शरीफ़ पढ़ना शुरू कर दिया.
मुल्लाह अभी दो
आयतें भी न पढ़ सका था कि उसके सामने रेशमी रुमाल में लिपटा एक पत्थर आ पड़ा, जिसे
उसने फौरन लपक कर जेब में रख लिया, इतने में मुल्लाह की बेटी सबा पानी लेकर आ गयी,
मुल्लाह ने गट-गट कर पानी पिया और अपने कमरे की तरफ़ तेज़ी से बढ़ा.
मुल्लाह ने कमरे
का दरवाज़ा बंद कर सबसे पहले अपनी जेब से रुमाल में लिपटा पत्थर निकाला, रुमाल के
अन्दर उसकी बेटी के लिए प्रेम पत्र था, पत्र को पढ़ कर मुल्लाह के होश फ़ाख्ता हो
गए, वह उछल कर फिर एक बार दुबारी में पहुँचा और गौर से मुआयना करने पर उसे दूसरे
पत्थर भी पड़े दिखाई पड़े. मुल्लाह पूरे दिन परेशान रहा, रात भर सर खुजाते खुजाते
गुजरी अगले दिन जुमे की नमाज़ के वक्त उसने अपने ख़ुतबे में ऐलान किया कि आज से हम
अपने पेशगी गुनाहों की तौबा करेंगे. मुल्लाह ने ताकीद की कि पहले मैं करूँगा फिर
उसके बाद सफ के दाहिने सिरे से हर नमाज़ी अपने पेशगी गुनाहों की तौबा करेगा.
नमाज़ के बाद सलाम
फेर कर मुल्लाह बोला, ‘या अल्लाह, मैं मुल्लाह नसरुद्दीन वल्द नूरुद्दीन अपने पेशगी
गुनाह का ऐतराफ़ करता हूँ, मजीद को अपने कारवां के साथ गए हुए पूरे छः महीने हो
चुके हैं, उसके जीने की नहीं तो मरने की ख़बर जरुर भिजवा दे ताकि मैं उसकी बेवा रिहाना
से निकाह कर सकूं, रिहाना मेरी बचपन की मोहब्बत है, सूदखोर व्यापारी मजीद के जंजाल
में फंस गयी है, अगर वह अपने कारवां पर किसी हमले का शिकार हो गया हो, फौत हो गया
हो तो ये ख़बर हम तक जल्दी भिजवा, रिहाना से निकाह के बाद मैं सामने वाली पहाडी पर
एक शानदार हवादार मस्जिद, बनवाऊंगा, जिसमे आने जाने वाले राहगीर रुक भी सकेंगे,
गर्मी में मन लगा कर तेरी इबादत भी करेंगे, मेरी दुआ कबूल फरमा, ये अगर गुनाह है
तो उसे माफ़ फरमा’, नमाज़ियों ने एक सुर में कहा ‘आमीन’
मुल्लाह के बाद
सफ के दाहिने हाथ से नमाज़ी मेहरबान ने अपना सिलसिला शुरू किया फिर दूसरे ने फिर
तीसरे ने. एक के बाद एक नमाज़ी ने आने वाले कल में उनसे जो गुनाह होने वाले थे उसके
लिए माफ़ी मांगने का सिलसिला शुरू किया. पूरे कस्बे में कौन किसके माल पर, जायदाद
पर, धन दौलत पर नज़रे गढ़ाए बैठा था सारी पोल खुलने लगी. सफ में अपना नंबर आने पर एक
नौजवान ने दुआ की, ‘मैं सरफ़राज़ वल्द मुमताज़ अपनी मोहब्बत के जुर्म का ऐतराफ करता
हूँ, मेरी मोहब्बत के दुश्मन मुल्लाह नसरुद्दीन को जल्दी से इस दुनिया से उठा ले
ताकि मैं उसकी बेटी सबा से निकाह कर सकूँ. अल्लाह मेरे इस पेशगी गुनाह को माफ़ फरमा.”
मुल्लाह के अलावा सब नमाज़ियों ने एक सुर में कहा ‘आमीन’.
रचनाकाल: १९
जुलाई,२०१५

बहुत अच्छा है
ReplyDeleteवाह! आग़ाज खूबसूरत है। अंजाम तो ग़जब करने वाला होगा।
ReplyDeleteख़ूब... ! बहुत ख़ूब... !!
ReplyDeleteख़ूब... ! बहुत ख़ूब... !!
ReplyDeleteजोरदार !
ReplyDeleteजिनकी खुद की जेबों में कई-कई रेशमी रुमाल होते हैं वही रेशमी रुमाल को आने-जाने से रोकने वालों की पांत में सबसे आगे खड़े होते हैं.
सुभानअल्लाह क्या बात है
ReplyDeleteसुभानअल्लाह क्या बात है
ReplyDeleteहा हा हा.. जब जाना, तब माना !..
ReplyDeleteशमशाद भाई, कुछ मासूम (?) कारिस्तानियाँ सनातनी हैं, रहती दुनिया तक होती रहने वाली हैं. यानी, लोग जवान होते रहेंगे.. रेशमी रूमालों में पर्चे आते रहेंगे.. उधर दुनिया ’मुहब्बत ज़िन्दाबाद’ चीखती हुई एक-दूसरे पर लानतें भेजती रहेगी.. फिर भी, खुद को सभी ’पाक-साफ़’ कहते रहेंगे.. तबतक.. जबतक कोई मुल्लानसीरुद्दीन अपने ग़ुनाहों को क़ुबूल करने की पहल कर सबको इसके लिए खोद न दे.
इस कड़ी के आग़ाज़ से ही इत्मीनान हो गया है, आपसे आगे बहुत कुछ सुनना है. बढिया और बेजोड़ सुनना है, इसकी आश्वस्ति बन रही है..
दिल से शुभकामनाएँ
शुरुआत शानदार है... मुबारकबाद
ReplyDeleteमुल्ला नसीरुद्दीन के इंसान के गुणों-अवगुणो, उसकी बुद्धिमानी, उसकी मूर्खता, उसका विश्वास या अविश्वास, उसकी आस्था, उसके ढुलमुल सोच, उसकी हाज़िरजवाबी उसकी हार और जीत की व्यक्ति-रूपांतरण मात्र है। मुल्ला नसीरुद्दीन किसी काल-खण्ड, भू-खंड, किसी धर्म/मज़हब, किसी देश या किसी नस्ल का नहीं है बल्कि एक शाश्वत तथ्य की तरह हर जगह विमान है। एक कहानी में अगर वह मध्यपूर्व के मध्युग काल-खंड में बगदाद के खलीफा के पास अपने पड़ोसी की शिकायत की फ़रियाद लेकर आएगा तो दूसरी कहानी में वह अपने संता सिंह के साथ उसके स्कूटर पर बैठ कहीं जा रहा होगा। अगर एक कहानी में अपने पड़ोसी को माँगने पर अपना गधा नहीं देगा पर दूसरी कहानी में वह हवाई जहाज़ से यात्रा कर रहा होगा। एक तरफ वह सुकरात के तर्ज़ पर दार्शनिक रहस्य की और इशारा करेगा वहीँ दूसरी और वर्तमान में नासा द्वारा मंगल पर भेजे जाने वाले पहले व्यक्ति का सौभाग्य प्राप्त करेगा। एक कहानी में मुजरे की नर्तकी को दिल दे बैठेगा तो दूसरी कहानी में सिनेमा में फिल्म देखेगा कभी उसको रातों में नींद इसिलए नहीं आती क्योंकि ऊपरी हिस्से में रहने वाले किरायेदार ने एक जूता तो निकाला पर दूसरा अभी तक क्यों नहीं निकाला, मुल्ला नसीरुद्दीन के लिए यही सबसे बड़ी समस्या है।
ReplyDeleteअंत मुल्ला नसीरुद्दीन हमे अपने व्यक्तिव में झांकने को मज़बूर करता है और हमे अपने अंदर बैठा नसीरुद्दीन को खोजने को मज़बूर करता है और यही सब इस चरित्र को आकर्षक बनाते हैं।
Bhout achi lage… Aameen
ReplyDeleteआपकी शैली जबरदस्त है, यकायक हँसा देने मे कामयाब है....
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